देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उत्तराखंड समता पार्टी के अध्यक्ष डॉ. वी.के. बहुगुणा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 8 जुलाई 2026 को जारी दो पृष्ठों के इस्तीफे में उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, निष्क्रिय नेतृत्व, कार्यकर्ताओं की कमी और राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए पद छोड़ने की घोषणा की।
यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं और सभी दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।
इस्तीफे में क्या बोले डॉ. वीके बहुगुणा?
अपने इस्तीफा पत्र में डॉ. बहुगुणा ने कहा कि उन्होंने लंबे आत्ममंथन के बाद अध्यक्ष पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि वर्ष 2021 में पार्टी की स्थापना उत्तराखंड की सांस्कृतिक अस्मिता, भौगोलिक अखंडता और संवैधानिक समानता की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी।
उन्होंने लिखा कि अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पूरी ईमानदारी, समय, ऊर्जा और अनुभव पार्टी को समर्पित किया, लेकिन अपेक्षित संगठनात्मक सहयोग नहीं मिल पाया।
संगठनात्मक कमजोरी — इस्तीफे की प्रमुख वजहें
- 1अधिकांश पदाधिकारी सक्रिय नहीं रहे
- 2संगठन विस्तार की जिम्मेदारी नहीं निभाई गई
- 3युवाओं को जोड़ने में पार्टी सफल नहीं हो सकी
- 4आर्थिक संसाधनों की कमी बनी रही
- 5अधिकांश जिम्मेदार लोग सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, जिनके पास पर्याप्त समय नहीं था
- 6केवल दो-तीन लोगों के भरोसे कोई भी राजनीतिक दल लंबे समय तक सफल नहीं हो सकता
किन मुद्दों को बताया अपनी उपलब्धि?
इस्तीफे में डॉ. बहुगुणा ने अपने कार्यकाल की कई उपलब्धियों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी अध्यक्षता में पार्टी ने कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को मुख्यधारा की राजनीति में लाने का प्रयास किया:
- पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भौगोलिक आधार पर परिसीमन की मांग
- सीमांत क्षेत्रों के लोगों के सत्यापन का मुद्दा
- वन एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों का विरोध
- अवैध निर्माणों के खिलाफ आवाज
- बाहरी ड्रग माफिया और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान
- उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और भौगोलिक अखंडता की रक्षा
अब क्या करेंगे डॉ. वीके बहुगुणा?
डॉ. बहुगुणा ने स्पष्ट किया है कि वे सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब वे सेंटर फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट एंड एनवायरमेंट (CRE) तथा उत्तराखंड जन विकास मंच जैसे सामाजिक संगठनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सुशासन, संतुलित विकास और उत्तराखंड के लोगों के अधिकारों के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक संसाधनों और भौगोलिक अखंडता की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।
चुनाव से पहले क्या होगा राजनीतिक असर?
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले यह इस्तीफा क्षेत्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि —
- इससे उत्तराखंड समता पार्टी की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ सकता है
- संगठन को नया नेतृत्व तलाशना होगा
- क्षेत्रीय दलों के बीच नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ सकती है
- अन्य राजनीतिक दल इस स्थिति का चुनावी लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं
अभी तक पार्टी की ओर से नए अध्यक्ष को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले डॉ. वीके बहुगुणा का इस्तीफा राज्य की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। उनके पत्र में संगठनात्मक कमियों और राजनीतिक परिस्थितियों का खुलकर उल्लेख किया गया है। आने वाले दिनों में पार्टी की अगली रणनीति और नए नेतृत्व पर सभी की नजर रहेगी।
मूल स्रोत
roshangaur.com — Dr. VK Bahuguna Resigned as Uttarakhand Samata Party Presidentप्रकाशित 8 जुलाई 2026
